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गुरुवार, 21 मार्च 2013

गरीब का बेटा

ये फोटो श्‍योपुर जिले के एक सहरिया बहुल गांव का है। यह बच्‍चा खुशकिस्‍मत है, क्‍योंकि इसके हाथ में रोटी है। गुरबत में सहरिया बच्‍चों को मवेशियों के गोबर में से उन फलों की गुठलियां बीनकर खानी होती हैं, जिन्‍हें मवेशी जंगल में खाकर लौटते हैं। अगर इस बच्‍चे और इसके मां-बाप को जंगल जाने की  इजाजत होती तो इसकी थाली में सिर्फ सूखी रोटी ही नहीं, सब्‍जी भी होती। गौरतलब है कि श्‍योपुर मध्‍यप्रदेश के सबसे कुपोषित जिले में से है।


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हां,  मैं गरीब का बेटा हूं
जिंदगी को सितम में कहता हूं
मजबूरियों में भी खुश रहता हूं
चंद बूंदों में पेट भर लेता हूं
  क्‍योंकि मैं गरीब का बेटा हूं।
कभी सब्‍जी तो कभी कुछ न मिले,
  नमक रोटी पर जी लेता हूं
जख्‍म चाहे जैसे भी हों
थोड़ी हल्‍दी मैं लगा लेता हूं
  क्‍योंकि मैं गरीब का बेटा हूं।
गम भी बहुत है, दर्द भी बहुत है दिल में
सब दबा लेता हूं
कभी अकेले तो कभी सबके सामने
आंखों से अंगूठा भिगो लेता हूं
क्‍योंकि मैं गरीब का बेटा हूं।

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